व्यापार मंडल की उल्लेखनीय उपलब्धियां

              अपने जन्मकाल से ही उ. प्र. उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल व्यापारी हितों व देश हितों के लिये लड़ता रहा है।  इस दीर्घ यात्रा में समय की पगडंडी पर कुछ पदचिह्न स्थाई आकार लेते चले गये हैं।  ऐसे ही कुछ पदचिह्नों का यहां उल्लेख किया गया है।  आप में से बहुत से साथी इन घटनाओं के प्रत्यक्ष साक्षी रहे होंगे और इन आंदोलनों की सफलता में अपना महत्वपूर्ण योगदान भी दिया होगा।  आप सभी से अनुरोध है कि अपने प्रेरक संस्मरण अपने युवा साथियों के लाभार्थ हमें भेजें।  यदि आपके पास उस घटना के कुछ चित्र / समाचार पत्रों की कतरनें भी हों तो वह भी हमें प्रेषित कर सकते हैं ।   

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२३ सितंबर १९७४ को काशी में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की स्थापना।

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१९७४ में व्यापारिक रैली आयोजित की जिसके फलस्वरूप गेहूं व्यापार का राष्ट्रीयकरण  समाप्त हुआ।

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१९७५ में व्यापार मंडल के बिक्रीकर सर्वे के समय सर्वे की प्रतिलिपि व्यापारी को देने का आन्दोलन चलाया और इसमें पूर्ण सफलता प्राप्त की।

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१९७९ में लाला बिशंभर दयाल अग्रवाल के नेतृत्व में लखनऊ में महामंत्री बनवारी लाल कंछल ने अपनी जान पर खेल कर सर्वे बहिष्कार का सफल संचालन किया। २५ मई को सर्वे बहिष्कार आंदोलन में लखनऊ के श्री हरिश्चंद्र अग्रवाल शहीद हुए। १० दिनों तक संपूर्ण प्रदेश बंद कर पूरे प्रदेश में हज़ारों व्यापारियों ने गिरफ्तारी दी। ५ जून को शासन ने सभी प्रकार के सर्वे बंद करने के आदेश दिये। अब तक के व्यापारी इतिहास में व्यापार मंडल की यह सबसे बड़ी सफलता थी।

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१९८० में बिक्रीकर अधिकारियों के न्याय एवं विवेक पर शासन द्वारा अंकुश लगाया गया।

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१९८० में कैश मीमो व बीजक पर १० पैसे का रेवेन्यू स्टांप लगना बंद हुआ।

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१९८१-८२ में १० प्रतिशत अतिरिक्त बिक्रीकर सरचार्ज समाप्त हुआ। १९६६ से १९७५ तक का बकाया ब्याज शासन द्वारा माफ किया गया।

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सैनेटरी इंस्पेक्टर, लेबर इंस्पेक्टर, बांट-माप, मंडी विबाग, बिक्रीकर विभाग और अन्य विभागों के सर्वेक्षण का दौर कम हुआ और सर्वे के नाम पर की जाने वाली लूट पाट कम हुई है।

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१९८३ में मंडी समिति के बैरियर की समाप्ति की श्री वीर बहादुर सिंह, शासन द्वारा घोषणा एवं प्रदेश में १३ वस्तुओं पर से शासन द्वारा मंडी शुल्क की समाप्ति की घोषणा।

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कपड़ा व्यवसाय पर से जिला पूर्ति कार्यालय का लाइसेंस शासन ने समाप्त किया।

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१९८८ में व्यापार मंडल के प्रयासों से श्री एन. डी. तिवारी सरकार द्वारा भट्टा एवं खांडसारी उद्योग में बिक्रीकर विभाग द्वारा कंपाउंडिंग स्कीम लागू की गई।

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१९८८ मे श्री एन. डी. तिवारी सरकार द्वारा खाद्यान्न लाइसेंसों को आजीवन बनाये जाने के शासनादेश जारी और व्यापार मित्र समिति का गठन।

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१९८८ में प्रांतीय कार्यालय के लिये निजी भवन की स्थापना हेतु शास्त्री नगर, लखनऊ में एक पुराने भवन का एलॉटमेंट करा कर कार्यालय स्थापित किया गया। साथ ही, व्यापार मंडल के खर्चों के लिये ५.५० लाख की सावधि जमा के स्थाई कोष की स्थापना की गई।

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१९८७ में आयकर के स्पेशल सर्वे का उत्तर प्रदेश में पूर्ण अंकुश। अन्य सर्वे में भी उत्पीड़न पर अंकुश।

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१३ सितंबर १९८९ को दिल्ली में ५ लाख व्यापारियों की विशाल रैली का आयोजन।

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२१ सितम्भर १९८९ को मुज़फ्फरनगर में छापों का डट कर विरोध। कई दिन तक बाज़ार बंद एवं सैंकड़ों व्यापारी रायबरेली, बाराबंकी एवं गोंडा जेलों में भेजे गये।

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१ अगस्त १९९० को मुलायम सिंह सरकार द्वारा व्यापार मंडल की पुरानी मांग स्वीकार करते हुए उ.प्र. से चुंगी समाप्ति की घोषणा।

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१९९१ में केंद्र श्री कल्याण सिंह सरकार द्वारा व्यापार मंडल की मांग पर गोल्ड कंट्रोल एक्ट की समाप्ति।

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१९९१ में ही श्री कल्याण सिंह सरकार द्वारा १३ वस्तुओं पर से आवश्यक वस्तु अधिनियम हटाया गया। जौ, ज्वार, बाजरा, मक्का को लाइसेंस मुक्त किया गया।

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१९९१ में ६२ वस्तुएं श्री कल्याण सिंह सरकार द्वारा बिक्री कर से मुक्त। ४४ वस्तुओं पर बिक्रीकर की दरें घटा कर दिल्ली के बराबर की गयी।

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१९९२ में श्री कल्याण सिंह सरकार द्वारा व्यापार मंडल की मांग पर जिला परिशद के समस्त बैरियर समाप्त। अड्डा टैक्स वसूली पर पूर्ण अंकुश।

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१४ अक्तूबर १९९२ को लखनऊ में पटरी दुकानदारों को उजाड़े जाने का सख्त विरोध। सरकार द्वारा दुकानदारों को उजाड़ने से पूर्व पुनर्वास के प्रबंध का निर्णय। पटरी दुकानदारों को लालबाग तथा आलमबाग में कई सौ पक्की दुकानों का आबंटन।

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श्री कल्याण सिंह सरकार द्वारा १९९२ में बिक्रीकर विभाग का रजिस्ट्रेशन आजीवन किया गया।

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१९९३ में राज्यपाल द्वारा ब्रेड, बेकरी, कंफेक्शनरी को आवश्यक वस्तु अधिनियम से मुक्त किया गया।

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१९९३ में लुब्रिकेंट, लोहा, इस्पात, जीरा, मिर्च, हल्दी, कालि मिर्च, धनिया, चना, मैदा, सूजी, गुड़, कॉफी, डीज़ल इंजन, पंपसैट, इलेक्ट्रिक मोटर, डबल रोटी, सोड ऐश आदि वस्तुओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत स्टॉक रजिस्टर एवं मूल्य सूची प्रदर्शन से मुक्त किया गया।

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चावल और गेहूं की अन्य प्रदेशों में निकासी को पूर्ण आज़ादी।

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१९९३ में प्रथम बार राजनैतिक दलों को व्यापार मंडल की शक्ति का एहसास। भाजपा, कांग्रेस एवं सपा - तीनों राजनैतिक दलों ने बिक्रीकर व धारा ३/७ को समाप्त करने की घोषणा की। चुनाव घोषणापत्रों में अन्य सुविधायें देने के वायदे भी किये गये।

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१९९४ में धारा ३/७ के अंतर्गत व्यापारियों पर मुकद्दमें दर्ज न करने के श्री मुलायम सिंह सरकार द्वारा आदेश जारी।

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धारा ३/७ के ८००० मुकद्दमें श्री मुलायम सिंह सरकार द्वारा वापस।

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आज सभी जनपदों, अधिकांश तहसीलों व कस्बों में व्यापार मंडल की लगभग ३००० इकाइयां कार्यरत हैं।

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विभिन्न जनपदों में निजी कार्यालय, क्रांतिरथ एवं स्थाई कोष की स्थापना।

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व्यापारी एवं व्यापार संगठन की शक्ति को शासन एवं समाज द्वारा मान्यता प्राप्त हुई।

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१९९५ में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल का पुनर्गठन।

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१९९५ से व्यापार मंथन पाक्षिक समाचार पत्र का प्रकाशन।

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१९९५ में व्यापार मंडल के साहित्य प्रकाशन हेतु व्यापार मंडल प्रकाशन समिति का गठन।

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१९९६ में राज्यपाल श्री मोती लाल वोरा द्वारा गुड़ का लाइसेंस एवं स्टॉक सीमा समाप्त करने के आदेश जारी।

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९ अप्रैल १९९९ को प्रवेश कर के विरोध में सफल प्रदेश बंद आयोजित किया गया जो पूर्ण सफल रहा।

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१० अप्रैल १९९९ को कारगिल युद्ध कोष में ५ करोड़ १ लाख रुपये संपूर्ण प्रदेश से भेंट किये गये।

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३१ अक्तूबर १९९९ व्यापार कर विभाग की मिठाई योजना का बहिष्कार।

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१९ जनवरी २००० - प्रदेश में व्यापार कर की बढ़ाई गयी दरें वापिस कराई गयीं।

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१० फरवरी २००० - प्रांतीय व्यापार भवन का शिलान्यास।

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३० जून २००० - फार्म ४९ के विरोध में प्रदेश बंद । फार्म ४९ वापिस।

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४ अगस्त २००० - आतंकवादियों द्वारा १०५ लोगों की नृशंस हत्या के विरोध में ४ अगस्त को प्रदेश बंद सफल।

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६ दिसंबर २००० - मुख्यमंत्री के आवास पर व्यापारी पंचायत का आयोजन। मुख्यमंत्री ने १९ मांगें मानी।

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२१ दिसंबर २००० - ऊर्जामंत्री श्री नरेश अग्रवाल के साथ बैठक। ऑपरेशन उजाला समाप्त। ऊर्जा बंधु का गठन।

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२६ जनवरी २००१ - गुजरात भूकंप में प्रदेश के कोने - कोने से वस्तुएं एवं ड्राफ्ट भेज कर सहयोग।

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२६ मार्च २००१ - मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा व्यापारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश वापिस।

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२६ मई २००१ - महिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल का सहकारिता भवन, लखनऊ में महिला प्रांतीय सम्मेलन।

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१४ सितंबर २००१ - मुख्यमंत्री आवास पर लघु उद्यमी पंचायत का आयोजन। व्यापार मंडल की १८ मांगें मानी गयीं।

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११ अक्तूबर २००१ - लखनऊ के गोमती तट पर उ.प्र. युवा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की विशाल युवा रैली संपन्न। मुख्यमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने व्यापारियों की कई मांगें स्वीकार कीं।

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१५ दिसंबर २००१ - उ.प्र. का ५ मंजिला व्यापार भवन का निर्माण पूर्ण। नये भवन में कार्यालय प्रारंभ। लगभग ४५ लाख रुपये भवन-निर्माण पर व्यय हुए। साज-सज्ज का कार्य जारी।

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२७ मार्च २००२ - केंद्र सरकार ने व्यापार मंडल की मांग स्वीकार की और इस प्रकार गेहूं, चावल, धान, मोटे अनाज, चीनी, खाद्य तेल, बीजों तथा तेलों की खरीद, बिक्री, भंडरण, परिवहन, वितरण, निपटान, उपयोग या उपभोग पर लगाये प्रतिबंध समाप्त किये गये।

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२९ अप्रैल २००२ - विद्युत कटौती, कानून व्यवस्था एवं व्यापार कर विभाग की ज्यदतियों के विरोध में प्रदेश के समस्त जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन सफल।

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९ जुलाई २००२ - व्यापार कर उत्पीड़न, ३/७ पुनः लागू किये जाने, बिजली कटौती, बिजली मूल्यों में वृद्धि, तहबाज़ारी तथा भ्रष्टाचार के विरोध में प्रदेश बंद सफल।

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२९ जुलाई २००२ - संस्थागत वित्तमंत्री लाल जी टंडन से वार्ता। व्यापारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश वापिस।

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१ अगस्त २००२ - पान मसाला और गुटका पर प्रतिबंध के विरोध में लखनऊ में विधान सभा के सामने धरना - प्रदर्शन । पान-मसाला की बिक्री पर लगा प्रतिबंध हटा।

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२९ अगस्त २००२ संस्थागत वित्त मंत्री लाल जी टंडन से वार्ता। फार्म ४९ स्थगित।


कोर कमेटी प्रभारी सैक्टर अध्यक्ष  *   नगर कार्यकारिणी सदस्यगण   संबद्ध संस्थायें * शहीद सेनानी

मंडल के उद्देश्य  *    उपलब्धियां  चयनित लक्ष्य  *    

संपर्क सूत्र प्रमुख घटनायें  * आगामी कार्यक्रम * समाचार कतरनें  *   चित्रों के आइने में