व्यापार मंडल के उद्देश्य

सम्मान

व्यापारी समाज के खोये हुए सम्मान को वापस प्राप्त करना ।

संगठन

छोटे छोटे व्यापारियों, दुकानदारों एवं समस्त उद्यमियों को बिना किसी भेदभाव के एक मंच पर संगठित करना ।

सुधार

व्यापारी समाज में व्याप्त कुरीतियों को सुधार कर नव चेतना उत्पन्न करना। मिलावट, घट-तौल, कर-अपवंचना आदि बुराइयों पर अंकुश लगाना एवं व्यापारी को देश का सर्वश्रेष्ठ नागरिक बनाना।

स्वतंत्रता

व्यापारी समाज को भ्रष्ट नौकरशाहों के उत्पीड़न से आज़ाद कराना। क्षेत्रीय दादाओं, गुंडों, राजनेताओं के शोषण से मुक्ति दिलाना।

परिवर्तन

देश मे लागू अव्यावहारिक काले कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन करना ताकि व्यापारी पूर्ण स्वतंत्रता, नैतिकता और ईमानदारी के साथ अपना व्यापार कर सकें।

प्रतिनिधित्व

नगर, निगम, नगर परिषद्‌, नगर पंचायत, विधान सभा, विधान परिषद्‌, आदि जन-प्रतिनिधित्व संस्थानों में व्यापारी वर्ग को समुचित प्रतिनिधित्व दिलवाना।

न्याय

व्यापारी समाज के आपसी विवादों को पंच फैसले से निबटा कर व्यापारियों को न्यायालयों के कष्टों से बचाना एवम शीघ्र एवं सच्चा न्याय दिलाना।

 

व्यापार मंडल द्वारा निर्धारित ’व्यापारी आचार संहिता

१.     हम कोई भी मिलावटी या नकली सामान नहीं बेचेंगे ।

२.     हम अपनी दुकान ठीक समय पर खोलेंगे और बंद करेंगे।

३.     हम ग्राहक से मोल-तोल नहीं करेंगे। स्टॉक सीमा से अधिक माल नहीं रखेंगे और उचित मूल्य पर ही सामान विक्रय करेंगे ।

४.    हम कम नहिं तौलेंगे । ऐसा कोई सामान अपनी दुकान में नहीं रखेंगे जो अंकित वज़न या नाप से कम हो।

५.    कर अपवंचन से दूर रहते हुए, सरकारी करों की अदायगी ठीक समय पर करेंगे।

६.     प्रत्येक ग्राहक को भगवान समझ कर उससे सम्मानपूर्ण व मधुर व्यवहार करेंगे। अपने व्यवहार में धर्म, सत्यता और  ईमानदारी का पूर्ण पालन करेंगे। अपने कर्मचारियों से भाई जैसा व्यवहार करेंगे।

७.    प्रत्येक व्यापारी की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझेंगे। किसी व्यापारी की शिकायत अन्य से नहीं करेंगे। व्यापार मंडल से आदेशों व कार्यक्रमों का अनुपालन सदैव सुनिश्चित करेंगे। किसी भी व्यापारी के दुःख दर्दों को दूर करने हेतु हम अपने सारे कार्य कुछ समय के लिये स्थगित करने में कदापि नहीं हिचकेंगे।

 

 

वर्ष 2009-10 हेतु चयनित लक्ष्य

 

*  समस्त जनपदों व तहसीलों में निजी व्यापार भवनों की स्थापना करना।

*  प्रत्येक कमिश्नरी मुख्यालय का दस लाख, जिला मुख्यालय का पांच लाख एवं अन्य सभी नगर परिषद का २ लाख का स्थाई कोष   अवश्य होना चाहिये।

*  समस्त जिलों में क्रांति रथों का निर्माण करना।

*  समस्त तहसील मुख्यालयों पर युवा व्यापार मंडल, महिला व्यापार मंडल, न्यायमंच,  उपभोक्ता मंच,  विद्युत उपभोक्ता मंच,  टेलीफोन उपभोक्ता मंच,  बैंक सेवा मंच,  व्यापार सुरक्षा मंच,  नगर विकास मंच  का अनिवार्यतः गठन करना ।

*  भारत वर्ष के समस्त प्रदेशों के जनपद व तहसीलों में व्यापार मंडलों का गठन करा कर भारतीय उद्योग मंडल को मज़बूत बनाना।

 

 

संकल्प


वेद-पुराणों से लेकर अंग्रेज़ी काल तक सेठ-साहूकार
भामाशाहों की पदवियों से अलंकृत व्यापारी-समाज को
स्वतंत्र भारत में अपना खोया हुआ सम्मान व स्थान प्राप्त करने हेतु
अपने वोटों और नोटों को संगठित कर राष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाना होगा।

- पं. श्याम बिहारी मिश्र,  राष्ट्रीय एवं प्रांतीय अध्यक्ष (सांसद)

 

हथकड़ी बेड़ियां काले कानूनों की तोड़ दी जायेंगी
हर तानाशाह के तूफानों की लहर मोड़ दी जायेगी।
जो बाज़ारों की ओर उठे, वह आंख फोड़ दी जायेगी।
जो व्यापारी को चोर कहे, वह जुबां काट दी जायेगी ।


अनुशासन संगठन का मूल आधार है
कार्यालय, कोष, क्रांति रथ और समाचार पत्र संगठन की मूल-भूत आवश्यकतायें हैं
इनके अभाव में संगठन की कल्पना निरर्थक है।

हम बड़े हैं, हमारा आचार व्यवहार भी बड़ा है ऐसे अभिमान का भारी बोझ सिर पर लाद कर मूर्ख लोग, तोते, रेशम के कीड़े और बंदर की तरह बरबस पराधीन हो जाते हैं।
 

कोर कमेटी प्रभारी सैक्टर अध्यक्ष  *   नगर कार्यकारिणी सदस्यगण   संबद्ध संस्थायें * शहीद सेनानी

मंडल के उद्देश्य  *    उपलब्धियां  चयनित लक्ष्य  *    

संपर्क सूत्र प्रमुख घटनायें  * आगामी कार्यक्रम * समाचार कतरनें  *   चित्रों के आइने में